Shahjahan in Hindi – शाहजहां हिंदी

Shahjahan-in-HindiShahjahan in Hindi

शाहजहाँ का असली नाम खुर्रम था। खुर्रम जहांगीर के पुत्रों में सबसे अधिक मेधावी, वीर तथा योग्य था। वह 1627 ई. में जहांगीर की मृत्यु के बाद गद्दी पर बैठा। युवराज रहते हुए उसने कई सैन्य अभियानों में हिस्सा लिया। दक्षिण में सूबेदार रहते हुए उसने निजामशाही की राजधानी बालाघाट और अहमदनगर पर कब्जा कर लिया। इसके लिए जहाँगीर ने उसे शाहजहाँ की उपाधि और पुरस्कार दिया।

Shahjahan in Hindi – शाहजहां हिंदी

बाद में गुजरात को भी उन्हें सौंप दिया गया। पहले तो वह अपनी सौतेली माँ नूरजहाँ के प्रभाव में था लेकिन बाद में 1622 में उसने अपने पिता के खिलाफ विद्रोह कर दिया। इसलिए जहाँगीर ने उसे सुदूर दक्षिण भारत में नियुक्त कर दिया। 1627 में जहांगीर की मृत्यु हो गई। खुसरो और परवेज (क्रमशः 1622 और 1626) की मृत्यु के कारण दो वारिस खुर्रम और शहरयार रह गए।

आसफखाना ने खुर्रम का पक्ष लिया, जबकि नूरजहाँ ने शहरयार का पक्ष लिया। आसफ खान ने खुर्रम को तुरंत दक्षिण से आगरा पहुंचने का संदेश भेजा। उस तक पहुँचने से पहले, आसफखाना ने शहर से लड़ाई की और उसे अंधा कर दिया, उसे मार डाला। इसके बाद, शाहजहाँ 4 फरवरी, 1628 को आगरा में गद्दी पर बैठा।

अपने पिता के शासनकाल में शाहजहाँ दक्षिण का गवर्नर रह चुका था। इस तरह उसे प्रशासनिक अनुभव प्राप्त था। उसने पिता के शासनकाल में अनेक बार सैनिक सफलताएं प्राप्त की। सिंहासन पर बैठते ही उसने मुगल साम्राज्य के विस्तार कार्य को प्रारम्भ किया। उसने निम्न प्रकार से मुगल साम्राज्य के विस्तार में अपना योगदान दिया :

Shahjahan in Hindi – शाहजहां हिंदी

गोलकुण्डा द्वारा मुगलों की अधीनता स्वीकार करना – दक्षिण के दो शक्तिशाली राज्यों की (अहमद नगर और बीजापुर) पराजय के बाद गोलकुण्डा के शासक का साहस टूट गया और उन दोनों राज्यों को जीतकर शाहजहां की महत्वाकांक्षा प्रवल होती गयी। उसने दक्षिण के अन्तिम महत्वपूर्ण राज्य गोलकुण्डा पर दबाव डालना शुरू किया।

वहां के शासक कुतुबशाह ने शाहजहां की अधीनता बिना लड़े ही स्वीकार कर ली। उसने खुत्तवे तथा सिक्कों में शाहजहां का नाम लिखना स्वीकार किया। उसने दो लाख हून (करीब 4-5 रूपये के मूल्य के बराबर का एक सिक्का) प्रतिवर्ष कर के रूप में देना स्वीकार किया। उसने समय आने पर मुगलों को सैनिक सहायता देने का भी वचन दिया। उसने (शाहजहा) इस तरह एक संधि के माध्यम से गोलकुण्डा राज्य को मुगलों के अधीन कर लिया।

कंधार विजय – कंधार 1621 ई. में जहांगीर के हाथों से निकलकर ईरान के प्रभुत्व में आ गया था। शाहजहां सम्राट बनने के बाद कंधार को जीतने के लिए 1631 ई. में एक मुगल सेना भेजी। वहां के राज्यपाल अलीमदीन ने अपने स्वामी ईरान के शाह को तुरंत सहायता भेजने के लिए संदेश भेजा सहायता समय पर न पहुंचने के कारण अलीमदीन ने मुगलों की अधीनता स्वीकार कर ली। इस प्रकार कंधार का प्रदेश पुनः मुगल साम्राज्य में सम्मिलित करने का श्रेय सम्राट शाहजहां को जाता है।

Click on below links to read more | अधिक पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें

More Hindi Blogs

History in Hindi Articles

Sher Shah Suri in Hindi – शेर शाह सूरी हिंदी

बलख अभियान – कंधार की विजय के बाद शाहजहां ने अपना ध्यान बलख और बदख्शा की ओर दिया। शहजादा मुराद और अलीमदीन ने यहां के आन्तरिक राजनीतिक झगड़ों से लाभ उठाने के लिए बलख पर आक्रमण कर दिया। वहां का शासक नजर मुहम्मद मुगलों की विशाल सेना को देख कर भयभीत हो ईरान की तरफ भाग गया तथा मुगलों ने बलख पर अधिकार कर लिया I

बलख पर मुगलों की विजय स्थायी नहीं रही क्योंकि शहजादा मुराद वहां रहने के लिये तैयार न था और उजबेग जनता उनके अधिकार में रहने के लिये बिल्कुल तैयार नहीं थी। उन्होंने तुरंत ही मुगलों के विरूद्ध चारों तरफ से छापामार हमले शुरू कर दिये। राजकुमार मुराद भारत लौटने के लिए इतना उतावला हो उठा कि वह सम्राट का आदेश प्राप्त किये बिना ही भारत लौट आया।

यद्यपि सम्राट ने औरंगजेब को वहां भेजकर स्थिति सम्भालने की कोशिश की परंतु वह भी सफल नहीं हुआ और बलख पुनः नजरमुहम्मद को सौंपना पड़ा। शाहजहां के इस अभियान से मुगल साम्राज्य को धन (2 करोड़) और जन (5,000 सैनिकों) की विशाल हानि उठानी पड़ी।

Shahjahan in Hindi – शाहजहां हिंदी

बलख में मुगलों की असफलता से प्रेरित होकर ईन के शाह ने अगले वर्ष ही कंधार पर आक्रमण कर दिया और दो महीनों के अंदर कंधार भी मुगलों के हाथों से निकल गया। संक्षेप में, शाहजहां ने अहमद नगर, बीजापुर, गोलकुण्डा के दक्षिण राज्यों की मुगल साम्राज्य का अंग बनाया लेकिन पश्चिम एशिया में उसे प्राप्त सफलता शीघ्र ही असफलता में बदल गयी।

अहमदनगर पर विजय – शाहजहां सम्राट बनने से पूर्व अहमद नगर के शासक के संरक्षक व सेनापति मलिक अम्बर को कई बार पराजित कर चुका था लेकिन जहांगीर अहमद नगर को स्थायी रूप से मुगल साम्राज्य का अंग बनाये नहीं रख सका। उसने (शाहजहां ने) अहमद नगर को पूरी तरह जीतकर मुगल साम्राज्य में हमेशा के लिए मिलने के लिए 1634 ई. में आक्रमण किया।

शाहजहां ने अहमद नगर और उनके हिमायती बीजापुर और गोलकुण्डा की संयुक्त सेना को परास्त कर दिया और अहमद नगर को मुगल साम्राज्य का अंग बना लिया गया।

बीजापुर की पराजय व मुगलों की अधीनता स्वीकार करना – शाहजहां ने अहमद नगर को जीतने से पहले 1631 ई. में अपने योग्य सेनापति आसफखां को बीजापुर जीतने के लिए भेजा था परंतु वह असफल रहा। अहमद नगर के साथ मुगल संघर्ष के समय बीजापुर (1634 ई.) में अहमद नगर को सैनिक सहायता दी थी। उसकी इस शत्रुता से शाहजहां बहुत क्रोधित हुआ और उसने बीजापुर को पाठ पढ़ाने के लिए उस पर आक्रमण कर दिया।

Shahjahan in Hindi – शाहजहां हिंदी

एक लम्बे युद्ध के बाद बीजापुर के शासक ने शाहजहां की अधीनता स्वीकार कर ली। बीजापुर ने मुगलों को वार्षिक कर देना स्वीकार कर लिया। बीजापुर ने न केवल 20 लाख रूपया कर के रूप में देना ही स्वीकार किया बल्कि अपनी विदेश नीति भी किसी सीमा तक मुगलों को सौंप दी I

क्योंकि बीजापुर के शासक आदिलशाह ने यह स्वीकार कर लिया कि जब कभी बीजापुर और गोलकुण्डा के बीच झगड़े की स्थिति पैदा होगी तो मुगल सम्राट को मध्यस्थता करने का अधिकार होगा। बीजापुर ने मराठा नेता शाहजी को सहायता न देने का भी वचन दिया। इस संधि के कारण बीजापुर मुगलों के अधीन आ गया तथा करीब 20 वर्षों तक बीजापुर और मुगलों में कोई संघर्ष नहीं हुआ।

शाहजहां का शासनकाल

मुगल वंश से हमारा अभिप्राय भारतीय इतिहास में 1526 ई. से लेकर 1707 ई. तक के काल को सामान्यतया मुगलकाल कहा जाता है। सूर वंश के शासन काल के बीच में लगभग पंद्रह वर्ष यदि हम निकाल दें तो यह वंश सैद्धांतिक एवं नाम मात्र को 1857 ई. तक चलता रहा। परंतु हम यहां मुगल वंश के शासनकाल को मोटे तौर पर 1526 ई. से 1707 ई. तक का मान कर चलते हैं।

Shahjahan in Hindi – शाहजहां हिंदी

शाहजहां का काल – शाहजहां ने 1627 ई. से 1657 ई. तक लगभग 30 वर्षों तक राज्य किया। इस काल को अनेक इतिहासकार मुगल वंश कालीन भारत के इतिहास का स्वर्ण युग मानते हैं।

स्वर्ण युग किसे कहा जाता है? – विज्ञान किसी युग को साधारणतः अभी स्वर्ण युग मानते हैं जबकि उस युग में प्रायः शांति एवं कानून की पूर्ण यवस्था रही हो। देश में समृद्धि और खुशहाली हो तथा प्रशासन उत्तम एवं साम्राज्य को वित्तीय संकट महसूस न हो। साथ ही, देश साहित्य, भाषा, कलाओं आदि के क्षेत्र में उन्नति करता चला गया हो।

क्या शाहजहां का युग स्वर्ण युग था? – उपर्युक्त कसौटी को ध्यान में रखकर कुछ इतिहासकार तो शाहजहां के काल को मुगल काल का स्वर्ण युग मानते हैं। मनूसी, बरनीवर और टवरनीयर जैसे इतिहासकार शाहजहां के काल की युक्त कंठ से प्रशंसा करते हैं। जबकि इतिहासकार वी. ए. स्मिथ जैसे विद्वान उनकी राय से सहमत नहीं हैं। हमें कोई भी निर्णय लेने से पूर्व दोनों पक्षों को देखना होगा।

Shahjahan in Hindi – शाहजहां हिंदी

प्रथम पक्ष

शाहजहां का शासनकाल स्वर्ण युग जो विद्वान एवं इतिहासकार शाहजहां के शासन काल को मुगल काल का स्वर्ण युग कहते हैं वे निम्न तर्क प्रस्तुत करते हैं l

सांस्कृतिक प्रगति की दृष्टि से – शाहजहां के काल में भारतीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं ने अत्यधिक प्रगति की। उसके काल में विद्वानों को संरक्षण मिला। वास्तुकला, संगीतकला, चित्रकला व साहित्य के क्षेत्र में अद्भुत प्रगति हुई।

वास्तुकला – उसने दिल्ली, आगरा व अन्य कई स्थानों पर सुन्दर भवन बनवाये। उसके काल में लाल पत्थर के साथ-साथ संगमरमर का प्रयोग बड़ी मात्रा में हुआ। कला पारखी विद्वान पर्सी ब्राउन का कहना है कि ‘शाहजहां को लाल पत्थर के मुगल नगर प्राप्त हुए और वह उन्हें संगमरमर के बनाकर छोड़ गया।

विश्व प्रसिद्ध ताजमहल उसकी सुन्दरतम इमारतों में से गिनी जाती है। उसने ताजमहल के अलावा आगरा में मोती मस्जिद दिल्ली का लाल किला, जामा मस्जिद और मयूर सिंहासन बनवाया।

Shahjahan in Hindi – शाहजहां हिंदी

संगीत कला – उसके दरबार में जगन्नाथ, रामदास, लालखा तथा महापत्तेर नामक संगीतकार अधिक प्रसिद्ध थे। सम्राट स्वयं गायक होने के साथ-साथ संगीत सुनने का बड़ा शौकीन था।

चित्रकला – वास्तुकला के साथ-साथ चित्रकला ने भी उसके काल में प्रगति की। उसका अपना बेटा दाराशिकोह को चित्रकला में गहरी रूचि थी। उसका मंत्री आसफखा भी समय का माना हुआ चित्रकार था चित्रकार मुहम्मद नादिर समकंदी उसके काल का सर्वोच्च चित्रकार था। उसकी चित्रकला के सुन्दर नमूने इसकी इमारतों में आज भी देखने को मिलते हैं।

Shahjahan in Hindi – शाहजहां हिंदी

साहित्य – शाहजहां के काल में फारसी तथा हिंदी दोनों भाषाओं के साहित्य में बड़ी उन्नति हुई। फारसी विद्वान थे-अब्दुल हमीद लाहौरी, शेखबहलोलकादरी। अमीर अबुल कासिम ईरानी हिन्दी साहित्य में जगन्नाथ सबसे लोकप्रिय कवि था।

कानून व प्रशासन की दृष्टि से – शाहजहां के काल में कानून व न्याय का राज्य था। उसने राजपूतों के साथ कुशल सम्बंध बनाये रखे उसके काल में अनेक अमीर एवं दरबारी बहुत ही स्वामीभक्त तथा ईमानदार थे। विदेशी यात्री टेवरनीयर (Tavernier) लिखता है कि “शाहजहां अपनी प्रजा से अपनी औलाद जैसा व्यवहार करता है।” उसने साम्राज्य की सीमाओं को सुरक्षित रखा तथा व्यापार एवं वाणिज्य की प्रगति के लिए प्रयत्न किये।

Shahjahan in Hindi – शाहजहां हिंदी

समृद्धि व धन की दृष्टि से – उसके काल में विदेशी व्यापार एवं सरकारी उद्योग धन्यों ने खूब प्रगति की उसकी कृषि से होने वाली आय भी बढ़ गयी कृषि ने लगातार प्रगति की।

द्वितीय पक्ष

शाहजहां का शासन काल स्वर्ण युग नहीं था जो विद्वान शाहजहां के शासन काल को स्वर्णयुग नहीं मानते जैसे स्मिथ तथा गैरिट, इत्यादि वे निम्न तर्क देते हैं:

कानून व व्यवस्था की स्थिति – शाहजहां के काल में कानून व व्यवस्था की स्थिति अच्छी नहीं थी क्योंकि उसके काल में बार-बार विद्रोह हुए। उसके जीते जी उसके चारों शहजादों ने उत्तराधिकार का युद्ध छेड़ दिया और अन्त में उसी के बेटे औरंगजेब ने उसे वर्षों केद में डाल दिया।

सुख-समृद्धि – शाहजहाँ के काल में सुख-समृद्धि नहीं थी। उसके काल में गुजरात व दक्षिण भारत में भयंकर अकाल पड़े।

Shahjahan in Hindi – शाहजहां हिंदी

फिजूल खर्ची – शाहजहां ने अपने इमारत बनाने के शौक को पूरा करने के लिए किसानों एवं अन्य लोगों से करों के रूप में बहुत-सा धन इकट्ठा किया तथा उनकी खून-पसीने की कमाई को पानी की तरह इमारतें बनाने एवं कंधार प्राप्त करने के लिए अनेक आक्रमण किये।

सारांश यह है कि शाहजहां के काल में जहां एक ओर ताजमहल व अन्य सुन्दर इमारतें बनी, व्यापार तथा वाणिज्य की प्रगति होने के साथ-साथ संगीतकला, चित्रकला एवं साहित्य ने उन्नति की वहां उसके काल में कुछ फिजूल खर्ची भी बढ़ी अन्य शासकों की सांस्कृतिक प्रगति को देखकर तो हम कह सकते हैं कि शाहजहां का काल मुगल वंश का स्वर्णयुग था I

लेकिन धीरे-धीरे मुगल वंश की नींव हिलने लगी, जिसका स्पष्ट प्रमाण औरंगजेब के काल में नजर आ गया। उसे अपने शासन काल के अन्तिम लगभग 30 वर्ष विद्रोहों को कुचलने में व्यतीत करने पड़े तो भी वह मुगल वंश को न बचा सका। 

Chhatrapati Shivaji Maharaj : छत्रपती शिवाजी महाराज चरित्र

Leave a Comment