Kalinga War – कलिंग का युद्ध

Kalinga-WarKalinga War

भारतीय इतिहास में ऐसे कई युद्ध हुए हैं जिन्होंने इतिहास ही बदल डाला। ऐसा ही एक युद्ध था- कलिंग युद्ध। इसने भारतीय इतिहास के पूरे कालखंड को ही बदल कर रख दिया था। इस युद्ध को भारतीस इतिहास का भीषणतम युद्ध कहा जाता है। चक्रवर्ती सम्राट अशोक ने अपने राज्याभिषेक के 8वें वर्ष (261 ई. पू.) में कलिंग पर आक्रमण किया था। कलिंग विजय उसकी आखिरी विजय थी।

Kalinga War – कलिंग का युद्ध

इतिहास के सबसे महानतम और शक्तिशाली शासक सम्राट अशोक और राजा अनंत पद्नाभन के बीच 261 ईसा पूर्व में यह युद्ध लड़ा गया इतिहास का सबसे भयावह युद्ध था। यह युद्ध अत्यंत विनाशकारी युद्ध था, जिसमें लाखों बेकसूर और मासूम लोग मौत के घाट उतर गए थे। हालांकि इस युद्ध के बाद ही सम्राट अशोक का ह्रदय परिवर्तन हुआ था और उन्होंने अहिंसा का मार्ग अपना लिया था और वे बौद्ध धर्म के अनुयायी बन गए थे।

युद्ध की विनाशलीला ने सम्राट को शोकाकुल बना दिया और वह प्रायश्चित्त करने के प्रयत्न में बौद्ध विचारधारा की ओर आकर्षित हुआ। कलिंग युद्ध ने अशोक के हृदय में महान परिवर्तन कर दिया । उसका हृदय मानवता के प्रति दया और करुणा से उद्वेलित हो गया। उसने युद्ध क्रियाओं को सदा के लिए बन्द कर देने की प्रतिज्ञा की। यहाँ से आध्यात्मिक और धम्म विजय का युग शुरू हुआ। उसने बौद्ध धम्म को अपना धर्म स्वीकार किया।

Kalinga War – कलिंग का युद्ध

बिन्दुसार की मृत्यु के पश्चात् उसका पुत्र अशोक पाटलिपुत्र के सिंहासन पर बैठा। वह भारतीय इतिहास का सर्वाधिक विख्यात शासक माना जाता है, जिसने लोगों के शरीर पर नहीं, वरन् हृदय पर शासन किया और अपने कार्यों से इतिहास में अमर हो गया। प्रोफेसर नीलकण्ठ शास्त्री ने अशोक की प्रशंसा में लिखा है, “वह संसार के सबसे बुद्धिमान शासकों में स्थान प्राप्त करने उचित अधिकारी है और उसके नेतृत्व में भारत को उस समय के सभ्य देशों में सर्वश्रेष्ठ समझा जाने लगा।

Kalinga War – कलिंग का युद्ध

अशोक को एक विशाल एवं सुसंगठित राज्य प्राप्त हुआ था, परन्तु उसने शासन प्रबन्ध में कुछ और सुधार करके उसे सुदृढ़ बनाया। उसके समय में धर्म, कला, एवं साहित्य के क्षेत्र में आश्चर्यजनक प्रगति हुई। अशोक के शासनकाल के बारे में हमें उसके शिलालेखों, स्तम्भ लेखों, गुफा लेखों से तथा बौद्ध, जैन, चीनी और तिब्बती साहित्य से विस्तृत जानकारी प्राप्त होती है।

राज्याभिषेक – अशोक 273 ई.पू. में मगध साम्राज्य का शासक बना, परन्तु उसका राज्याभिषेक इसके चार वर्ष पश्चात् 269 ई.पू. में हुआ। डॉ. रोमिला थापर एवं डॉ. आर. एस. त्रिपाठी के अनुसार चार वर्ष के अन्तर का प्रमुख कारण यह था कि अशोक को सिंहासन प्राप्ति के लिए अपने भाइयों से उत्तराधिकार सम्बन्धी युद्ध लड़ना पड़ा था। 269 ई. पू. तक उसने अपने भाइयों को पराजित कर दिया था और राजसिंहासन पर दृढतापूर्वक अधिकार कर लिया था, इसलिए उसका राज्याभिषेक 269 ई.पू. में हुआ।

Kalinga War – कलिंग का युद्ध

अशोक की विजयें

काश्मीर विजय – कल्हण की राजतरंगिणी के अनुसार अशोक काश्मीर का प्रथम मौर्य सम्राट था। उसी ने श्रीनगर बसाया तथा काश्मीर की घाटी में अनेक चैत्यों और स्तूपों का निर्माण करवाया था। यह भी सत्य है कि काश्मीर पर न तो चन्द्रगुप्त ने आक्रमण किया और न ही बिन्दुसार ने ही। चूंकि राजतरंगिणी के अलावा अन्य कोई स्त्रोत उसकी काश्मीर विजय की पुष्टि नहीं करता है, अतः उसकी इस विजय को प्रामाणिक मानने में काफी कठिनाइयां हैं।

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कलिंग की विजय (262-261 ई.पू.) – अशोक के शिलालेख XIII से पता चलता है कि उसने राज्याभिषेक के आठ वर्ष पश्चात् अर्थात 262-261 ई.पू. में दक्षिण पूर्व में अपने पड़ौसी राज्य कलिंग पर आक्रमण किया था। आधुनिक उड़ीसा और मद्रास के गंजम के प्रदेश को प्राचीनकाल में कलिंग के नाम से पुकारा जाता था।

आक्रमण के कारण

(i) अशोक अपने दादा तथा पिता की भांति साम्राज्यवादी नीति का पालन करना चाहता था, परन्तु उसके साम्राज्य के समीप ही कलिंग एक स्वतन्त्र राज्य था, जो अपनी सैनिक शक्ति में निरन्तर वृद्धि करता जा रहा था। अशोक की नीति में कलिंग जैसे स्वतन्त्र राज्य के लिए कोई स्थान नहीं था।

Kalinga War – कलिंग का युद्ध

(i) डॉ. भण्डारकर के अनुसार जब बिन्दुसार ने चल तथा पाण्ड्य राज्यों पर आक्रमण किया था, तब कलिंग नरेश ने उन राज्यों की सहायता की थी, जिसके कारण बिन्दुसार की पराजय हुई। इसलिए अशोक अपने पिता की पराजय का बदला लेना चाहता था।

(iii) अशोक कलिंग पर अधिकार कर अपने साम्राज्य के एकीकरण को पूर्ण करना चाहता था। पूर्व में बंगाल तथा दक्षिण में आन्ध्र के प्रदेशों पर उसका अधिकार था. परन्तु इनके बीच कलिंग का प्रदेश स्वतन्त्र था। अतः अशोक कलिंग पर अधिकार कर साम्राज्य को एकता के सूत्र में बांधना चाहता था। डॉ. डी. आर. भण्डारकर के अनुसार, ‘”ऐसा प्रतीत होता है कि कलिंग उसके साम्राज्य रूपी शरीर में कांटे के समान था।

इसलिए राज्य की सुरक्षा तथा स्थिरता के लिए कलिंग पर विजय प्राप्त करना तथा अपने समस्त साम्राज्य को एक ही सूत्र में बांध देना अतिआवश्यक था, और यही उसने किया। डॉ. रोमिला थापर ने इस सम्बन्ध में लिखा है कि, “कलिंग युद्ध का वास्तविक कारण यह था कि अशोक दक्षिण भारत की ओर जाने वाले जल तथा स्थल दोनों मार्गों को अपने अधीन करना चाहता था।”

Kalinga War – कलिंग का युद्ध

कलिंग का युद्ध – कलिंग बड़ा शक्तिशाली राज्य था। मेगस्थनीज के अनुसार चन्द्रगुप्त मौर्य के समय में कलिंग के राजा की सेना में 60,000 पैदल सैनिक, 1,000 घुड़सवार तथा 700 हाथी थे। अशोक के आक्रमण तक उसकी सैनिक शक्ति में अवश्य ही वृद्धि हुई होगी। कलिंग के लोगों में राष्ट्रीय भावना प्रबल रूप से विद्यमान थी।

अतः जब अशोक की विशाल सेना ने कलिंग पर आक्रमण किया तो कलंगवयों न सम्पर्ण शक्ति से अन्तिम क्षण तक अशोक का डटकर मुकाबला किया। कहते हैं कि यह युद्ध चार साल तक चलता रहा। कलिंग का शासक कौन था और अशोक ने किस प्रकार उससे युद्ध किया। इस बारे में हमें कोई जानकारी प्राप्त नहीं होती।

अशोक के 13वें शिलालेख से केवल यह मालूम होता है कि, “इस युद्ध में 1,50,000 पुरुषों को देश निकाला दे दिया गया। 1,00,000 पुरुष मारे गये और इनसे भी कई गुणा अधिक घायल हुए।” डॉ. राधाकुमुद मुकर्जी के अनुसार कलिंग के युद्ध में कुल चार लाख व्यक्ति मारे गये। इस प्रकार भयंकर रक्तपात के पश्चात् अशोक को इस युद्ध में विजय प्राप्त हुई। कलिंग को साम्राज्य में सम्मिलित कर लिया गया। इस प्रकार यह एक नया प्रान्त बन गया, जिसकी राजधानी तोशाली थी।

Kalinga War – कलिंग का युद्ध

युद्ध का महत्व –

(i) कलिंग की विजय से अशोक के साम्राज्य का विस्तार हुआ तथा कलिंग राज्य की स्वतन्त्रता समाप्त हो गई।

(i) कलिंग के युद्ध में हुए नरसंहार से अशोक का हृदय परिवर्तन हो गया। अब उसने युद्ध की नीति का सदा के लिए त्याग कर दिया तथा शान्ति की नीति के आधार पर विश्व विजय करने का निश्चय किया। इस प्रकार कलिंग का युद्ध विश्व के युगान्तरकारी युद्धों में से एक था।

(iii) कलिंग के युद्ध के बाद अशोक ने शासन प्रबन्ध में सुधार किये I प्रजा की भलाई तथा सुख के लिए बहुत से कार्य किये। बौद्ध धर्म का भारत तथा अन्य देशों में प्रसार किया। इस धर्म के अहिंसा के सिद्धान्त को व्यावहारिक रूप से अपना लिया और पशुबध बन्द कर दिया।

(iv) कलिंग के युद्ध से प्रभावित होकर अशोक ने कुछ नैतिक नियमों का संग्रह करके धर्म की स्थापना की ताकि लोगों का परलोक भी सुधारा जा सके। इस धर्म के प्रचार हेतु महामात्र नामक कर्मचारी नियुक्त किये गये।

Kalinga War – कलिंग का युद्ध

(v) कलिंग के युद्ध का अशोक के हृदय पर गहरा प्रभाव पड़ा। डॉ. राधाकुमुद मुकर्जी अनुसार, “युद्ध के भयानक प्रभावों ने अशोक के चरित्र में क्रान्ति उत्पन्न कर दी।” के इस युद्ध से पूर्व वह शिकार खेलता था। भोग विलास का जीवन व्यतीत करता था, परन्तु इस युद्ध से प्रभावित होकर उसने शिकार खेलना तथा मांस खाना छोड़ दिया। भौग विलास का जीवन त्याग दिया तथा अपना अधिकांश समय धार्मिक कार्यों में व्यतीत करने लगा।

(vi) कलिंग का युद्ध मौर्य साम्राज्य के पतन का एक प्रमुख कारण सिद्ध हुआ। इस युद्ध के परिणाम अशोक ने युद्ध की नीति को सदा के लिए त्याग दिया। अतः इस युद्ध के पश्चात् मौर्य सेना को उसके शासनकाल में युद्ध करने का कोई अवसर न मिला। इसलिए सैनिक आलसी तथा अयोग्य हो गये। यही कारण था कि अशोक की मृत्यु के बाद जब यूनानियों के आक्रमण हुए, तो यह अयोग्य सेना उनका सफलतापूर्वक सामना न कर सकी, जिसके कारण मौर्य साम्राज्य का पतन हो गया। 

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